
पब्लिक फोकस कमांद(मंडी)
मंडी आईआईटी ने एक ऐसा यंत्र विकसित किया है जो मानवीय खून की एक बूंद से ही कई बीमारियों की पहचान कर लेगा। खून की एक बूंद ही शरीर से ली जाएगी और फिर मानवीय शरीर की कई बीमारियों की जांच इसी से हो जाएगी। मंडी आईआईटी ने बिलीरूबिन नाम का यह यंत्र बनाया है और इसका पेटेंट भी हासिल कर लिया है। मंडी के शोधकर्ताओं ने एक नया उपकरण विकसित किया है। यह उपकरण खून के सीरम की एक 50 माइक्रोलीटर खून की बूंद को हवा में लटकाकर बिना छुए बिलीरुबिन की जांच करता है। इससे लीवर और किडनी संबंधी बीमारियों का जल्दी पता चल सकता है।
इस आविष्कार का पेटेंट भी करवा लिया गया है।
नई और पुरानी जांच में बडा बदलाव
पारंपरिक जांच में खून को क्यूवेट में डालना पड़ता है। इससे नमूना दूषित होने का खतरा बना रहता है और इसमें खून की भी ज्यादा मात्रा की जरूरत होती है। नया उपकरण ध्वनिक लेविटेशन तकनीक से बूंद को हवा में लटकाता है और फिर 400 से 700 नैनोमीटर के प्रकाश से अवशोषण मापा जाता है। इस माप को बिलीरुबिन की मात्रा में बदला जाता है। इसके बाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता वाला मॉडल पीलिया, सिरोसिस, हेपेटाइटिस जैसी लीवर की बीमारियों और किडनी संबंधी समस्याओं का आकलन करता है। यह तकनीक प्रयोगशाला में सफलतापूर्वक जांची जा चुकी है।
एक बूंद खून से बीमारी जांच उपकरण यूं बना
यह शोध मंडी आईआईटी के स्कूल ऑफ मैकेनिकल एंड मैटेरियल्स इंजीनियरिंग और सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स के संयुक्त प्रयास से किया गया है। इसमें देवकृष्ण कुमार चौधरी, योगेश दासगांवकर, डॉ. दुबे धीरज प्रकाशचंद, डॉ. राधे श्याम शर्मा और डॉ. रविंद्र नायक बुकके शामिल हैं। इस काम को एनआईडीएचआई प्रयास कार्यक्रम के तहत आईआईटी मंडी कैटेलिस्ट से सहायता मिली है।
बीमारी जांचने में होगा साहयक
मंडी आईआईटी विशेषज्ञ प्रो देवकृष्ण कुमार चौधरी बताते हैं कि यह उपकरण कम खून से, बिना संपर्क के और जल्दी जांच करने की क्षमता के कारण खास तौर पर उपयोगी साबित हो सकता है।
