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गावर कंपनी की लापरवाही से पीड़ित परिवार जाग कर काट रहा रातें

प्रभावित परिवार बोला, समाधान निकालने के बजाए धमकाते हैं कंपनी के कर्मचारी, एफआईआर की तैयारी

कृष्ण भोज, पब्लिक फोकस पधर।

मंडी-पठानकोट फोरलेन के चरण पांच नारला से बिजनी के बीच द्रंग में नाले का चैनलाइजेशन न होने के कारण
मसेरन गांव निवासी मुरारी लाल का नवनिर्मित मकान खतरे की जद में आ गया है। गावर कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा सड़क कटिंग व समतलीकरण कार्य तो कर दिया गया, परंतु नाले की दिशा को नियंत्रित करने की व्यवस्था नहीं की गई। परिणामस्वरूप भारी बारिश के दौरान सारा पानी और मलबा सीधे मकान की ओर बह रहा है।

रात को मलवे ने डराया।

शनिवार रात की मूसलाधार बारिश ने स्थिति को और भी भयावह बना दिया। मलबे के दबाव से मकान के पीछे बना डंगा ढह गया और सीवरेज टैंक पत्थरों से भर गया है। अब मकान की नींव और दीवारें भी खतरे में हैं। मुरारी लाल के अनुसार, उनका पुराना मकान पहले ही अधिग्रहण में जा चुका है और हाल ही में बनाए गए नए घर को अब खतरा है।

कंपनी पर मनमर्जी का आरोप। 

परिवार का कहना है कि 14 फरवरी को जब फोरलेन कटिंग का कार्य शुरू हुआ था, तब ही कंपनी को चैनलाइजेशन की आवश्यकता से अवगत करा दिया गया था। कंपनी ने आश्वासन दिया लेकिन कार्य नहीं किया।

 

SDM को शिकायत भी पानी।

इस संबंध में एसडीएम पधर को भी शिकायत दी गई थी, जिसके बाद एनएचएआई, कंपनी व प्रशासन द्वारा संयुक्त निरीक्षण हुआ। इसके बावजूद बरसात से पहले कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

अब FIR की तैयारी।

पीड़ित परिवार ने अब कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की तैयारी कर ली है। मुरारी लाल ने स्पष्ट कहा कि यदि उनके मकान को कोई नुकसान हुआ या जान-माल की हानि हुई, तो इसकी जिम्मेदारी गावर कंपनी और एनएचएआई की होगी।

कल आएंगे SDM, करेंगे मौका।

उधर, कार्यवाहक एसडीएम डॉ. भावना वर्मा ने बताया कि उन्हें इस शिकायत की जानकारी मिली है और सोमवार को मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया जाएगा।

जिला मंडी में रेड अलर्ट जारी, फोरलेन किनारे रहने वाले परिवारों में बढ़ी चिंता

मौसम विभाग ने एक बार फिर जिला मंडी में भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है। इस चेतावनी के बाद मंडी-पठानकोट फोरलेन के किनारे रहने वाले लोगों में दहशत का माहौल है। पहले से ही भूस्खलन और पानी के तेज बहाव से प्रभावित कई क्षेत्रों के निवासी अब किसी भी संभावित आपदा को लेकर चिंतित हैं।

विशेषकर द्रंग क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांवों में फोरलेन निर्माण के चलते कई स्थानों पर उचित जल निकासी न होने से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि संबंधित निर्माण कंपनियां और प्रशासन समय रहते ठोस कदम नहीं उठाते हैं, जिससे हर बारिश उनके लिए संकट बन जाती है।

 

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