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हिमाचल पुलिस के दो अधिकारी आमने-सामने, शिमला एसपी ने गांधीगिरी छोड़ सीधे पुलिस प्रमुख को लपेटा, पुराने को भी नहीं बख्शा!

विमल नेगी मौत मामले की जांच पर तकरार आई सामने, संजीव ने न्याय पाने को हाईकोर्ट का किया रूख।

रूपलाल चौधरी, पब्लिक फोकस शिमला।

इंजीनियर विमल नेगी मौत मामले में उलझी सियासत के बीच हिमाचल पुलिस के दो आला अधिकारी आमने-सामने आ गए हैं। शिमला एसपी संजीव गांधी ने पुलिस प्रमुख अतुल शर्मा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शिमला एसपी ने कहा कि डीजीपी विमल नेगी मौत मामले में हस्तक्षेप कर जांच को ही प्रभावित कर रहे हैं। इस मामले में प्रैस के सामने आए गांधी ने पुराने डीजीपी संजय कुंडू को भी लपेट दिया है। अहम बात है कि कुंडू पर एसपी ने आरोप लगाया कि शिमला होटल ब्लास्ट को उन्होंने आतंकी घटना बनाने की कोशिश की। शिमला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) संजीव गांधी ने एक सनसनीखेज बयान में राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) अतुल वर्मा पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। गांधी ने कहा कि DGP ने विमल नेगी मामले में अदालत को गुमराह किया और जांच प्रक्रिया में न सिर्फ दखल दिया बल्कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश भी की।

एसपी ने कहा कि विमल नेगी मामले में DGP ने अदालत में झूठा शपथ पत्र दिया और जांच प्रक्रिया में बार-बार हस्तक्षेप किया गया. उन्हीं (डीजीपी)की जांच टीम ने इस मामले की जांच की थी और उन्होंने सबूतों के साथ छेड़छाड़ की कोशिश कर पुलिस विभाग की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया. गौरतलब है कि इस मामले में विमल नेगी के शव के पास से पेनड्राइव को गायब किया गया था, जिसे एसपी की टीम ने बाद में खोजा था। SSP गांधी ने कहा कि उन्होंने यह जांच पूरी ईमानदारी और 26 वर्षों की पेशेवर सत्यनिष्ठा के साथ की ही। उन्होंने कहा कि मुझे अपनी ईमानदारी पर नाज है और नौकरी से कोई मोह नहीं है। गांधी ने कहा डीजीपी ने विमल नेगी मौत मामले में गलत शपथ पत्र दाखिल किया है। उन्होंने कहा कि एमएलए खरीद फरोख्त मामले सहित कई अन्य मामलों की जांच कर रही है ऐसे में इस पुरी टीम को सुरक्षा मुहैया करवाई जाए। उन्होंने कहा विमल नेगी के परिजनों को न्याय मिलना चाहिए। इसके लिए हाईकोर्ट से न्याय मांगा जाएगा और सीबीआई के समक्ष पूरे दस्तावेज रखें जाएंगे।

सवाल जो मांग रहे जबाब – 

1. ASI ने किसके कहने पर पेन ड्राइव को छुपाया? तथा किसके कहने पर ASI ने इसको खाली कर दिया?

यहीं से पूरे मामले का सच सामने आ जाएगा तथा इसमें कितने पैसों का लेनदेन हुआ।

2. ASI के फोन से ही सारा हिसाब किताब निकल जाएगा कि उसको किस-किस के फोन आए?

3. अगर ASI संजीव गांधी की टीम का हिस्सा था तो फिर पेन ड्राइव छुपाना और इसको फॉर्मेट करने की सुई उनकी तरफ भी मुड़ रही है?

4. संजीव गांधी के फोन की भी गहन जांच होनी चाहिए SIT के मुखिया के तौर पर उनकी भूमिका की भी CBI द्वारा जांच हो?

5. क्या जांच भटकाने और जांच के नाम साक्ष्य नष्ट करने के लिए पूरी SIT पर FIR DGP हिमाचल प्रदेश को दर्ज करवानी चाहिए?

ईमानदार और कर्मठ होने का राग हाईकोर्ट में गाने से काम नहीं चलेगा। DGP ने जिस तरह से एफीडेविट हाइकोर्ट में दाखिल कर पेन ड्राइव मोबाइल फोन और साक्ष्य गायब करने का पूरा सच सामने रखा है उस से सवाल तो पूरी SIT पर भी उठा है।

हाईकोर्ट ने गांधी को लगाई थी फटकार।

संजीव गांधी को हाईकोर्ट ने तब फटकार लगाई थी जब वह डीजीपी के शपथ पत्र पर सवाल उठा रहे थे। हाईकोर्ट की कार्रवाई का वीडियो लीक होने के मामले में भी संजीव गांधी आहत हैं और इस पूरे प्रकरण में न्याय पाने के लिए हाईकोर्ट का रूख करने का मन बनाया है। हाईकोर्ट ने संजीव गांधी को कानून पढ़ाया था और उसी का वीडियो वायरल हो गया है। इस वीडियो लीक मामले में संजीव गांधी ने धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा को मास्टरमाइंड बताया है।

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