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नीदरलैंड जाएंगे पालमपुर के कृषि विज्ञानी, इंग्लैंड ने दिए पौने दो लाख!

पब्लिक फोकस पालमपुर।

चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के वैज्ञानिक नीदरलैंड में अंतरराष्ट्रीय पशु कल्याण कांग्रेस में भाग लेंगे यह जानकारी देते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. नवीन कुमार ने बताया कि पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान महाविद्यालय के पशुधन फार्म परिसर विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ. अंकज ठाकुर को नीदरलैंड के यूट्रेक्ट में इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर एप्लाइड एथोलॉजी (आईएसएई) 2025 कांग्रेस में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया है जो 4 से 8 अगस्त, 2025 तक आयोजित हो रही है । डॉ. ठाकुर पशु व्यवहार और कल्याण विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने पर अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में भाग लेने के लिए प्रतिष्ठित ‘अंतर्राष्ट्रीय यात्रा पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है।

1,555 पाउंड (लगभग 1.77 लाख रुपये) की राशि का यह पुरस्कार ‘यूनिवर्सिटीज फेडरेशन फॉर एनिमल वेलफेयर (यूएफएडब्ल्यू), इंग्लैंड’ और इसके ‘कांग्रेस अटेंडेंस फंड’ (सीएएफ) द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया गई है। गौर तलव है कि 112 अंतरराष्ट्रीय आवेदकों में से चुने गए डॉ. अंकज ठाकुर का शोध अपनी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और अंतरराष्ट्रीय पशुधन कल्याण प्रणालियों पर संभावित प्रभाव के लिए सामने आया। उनका अग्रणी कार्य उत्तर-पश्चिमी हिमालय में पारंपरिक ट्रांसह्यूमनट प्रणालियों के तहत पाली जाने वाली प्रवासी गद्दी बकरियों के कल्याण और शारीरिक लचीलेपन पर केंद्रित है। उन्होंने प्रवासी बकरियों के लिए दुनिया का पहला संरचित कल्याण मूल्यांकन प्रोटोकॉल विकसित किया है। प्रवासी पशुधन प्रणालियों में मौसमी पशुओं के कल्याण के मूल्यांकन में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह शोध डॉ. एम.एल. काम्बोज (राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल) और डॉ. पी.के. डोगरा (पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय) के मार्गदर्शन में किया गया था।

डॉ. ठाकुर को उनकी उपलब्धि पर बधाई देते हुए कुलपति डॉ. नवीन कुमार ने कहा, “यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान न केवल हमारे विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक उत्कृष्टता को दर्शाता है, बल्कि विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी बढ़ाता है। इस तरह के योगदान स्थायी पशुधन प्रणालियों को बढ़ावा देने और पशुपालक समुदायों में पशु कल्याण की चुनौतियों का समाधान करने में सहायक होते हैं।”

पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान महाविद्यालय के डीन डॉ. ए.के. पांडा और पशुधन फार्म परिसर की प्रमुख डॉ. शिवानी कटोच ने भी बधाई दी और कहा कि यह उपलव्धि पशु कल्याण विज्ञान में नवाचार और उत्कृष्टता के लिए कॉलेज की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती हैं। आईएसएई 2025 में डॉ. ठाकुर की भागीदारी पशु कल्याण और स्थायी पशुपालन पर अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं में भारत की आवाज़ को बढ़ाएगी, साथ ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर क्षेत्र के अद्वितीय शोध योगदान को प्रदर्शित करेगी।

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