
रूपलाल चौधरी, पब्लिक फोकस शिमला।
हिमाचल में गांधी बुरे फंसे हैं। एक तरफ सुक्खू सरकार की आंखों में खटके हुए हैं तो दूसरी तरफ हिमाचल हाईकोर्ट भी आंखें तरेर रहा है। विमल नेगी मौत मामले की जांच हाईकोर्ट द्वारा CBI के हवाले किए जाने के बाद जो मेंबर शिमला एसपी रहे संजीव गांधी ने अपनाए हैं उसके बाद तो सुक्खू सरकार भी उनसे पिंड छुड़ाती नजर आई है साथ ही विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने भी सवालों की बंदूक उनकी ओर ही कर दी है। इसी बीच हाईकोर्ट से अब एक नया नोटिस संजीव गांधी को थमा दिया गया है। यह मामला झूठा शपथ पत्र दिए जाने से संबंधित है और हाईकोर्ट ने नोटिस में कहा है कि क्यों ना आपके खिलाफ ही कार्रवाई की जाए।
विमल नेगी मौत मामले में आईपीएस संजीव गांधी ने जिस तरह का रूख अभी तक अपना रखा है उससे पुलिस विभाग में भी हड़कंप मचा हुआ है। गांधी से हाईकोर्ट ने जवाब मांगा है। हाईकोर्ट की तरफ से कहा गया है कि झूठा हल्पनामा दायर कर अदालत को भ्रमित किया गया है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आईपीएस अधिकारी संजीव गांधी को नोटिस जारी करते हुए 3 सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। मामला एक आपराधिक अपील से जुड़ा हुआ है। इसमें संजीव गांधी ने बतौर एसपी शिमला झूठा शपथ पत्र दायर कर कोर्ट को यह बताया कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 32 ए के तहत दोषी की सजा निलंबित नहीं की जा सकती है, जबकि सुप्रीम कोर्ट इस प्रावधान को पहले ही असंवैधानिक ठहरा चुका है। हाईकोर्ट ने इस मसले को गंभीर माना और कहा कि शपथपत्र को देखकर लगता है कि न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास किया गया है। अदालत ने संजीव गांधी से स्पष्टीकरण मांगा है। नोटिस में कहा गया कि वह यह बताएं कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाए।




